हार्ट की नसों में ब्लॉकेज है तो दवा से काम चलेगा या सर्जरी की जरूरत होगी

हार्ट की नसों में ब्लॉकेज है तो दवा से काम चलेगा या सर्जरी की जरूरत होगी

मुरादाबाद: जब किसी व्यक्ति में कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी हृदय की आर्टरीज़ में ब्लॉकेज का पता चलता है, तो मरीजों और उनके परिवारों के मन में सबसे आम सवाल यही होता है कि क्या आर्टरीज़ में मौजूद ब्लॉकेज को केवल दवाओं से दूर किया जा सकता है या इसके लिए एंजियोप्लास्टी अथवा सर्जरी जैसी प्रक्रिया जरूरी होगी। इसका जवाब ब्लॉकेज की गंभीरता, उसकी जगह, हृदय तक रक्त प्रवाह पर उसके प्रभाव और मरीज की समग्र स्थिति पर निर्भर करता है। 


कोरोनरी आर्टरीज़ में ब्लॉकेज तब विकसित होता है जब आर्टरीज़ की दीवारों के भीतर वसा, कोशिकीय अवशेष और कैल्शियम जमा होकर एथेरोस्क्लेरोटिक प्लाक बना देते हैं। समय के साथ यह प्लाक आर्टरीज़ के अंदर की जगह को संकरा कर देता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचने वाले रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।  


बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के चेयरमैन एवं चीफ डॉ. रामजी मेहरोत्रा ने बताया “स्टैटिन और अन्य लिपिड-लोअरिंग दवाएं आर्टरीज़ में सूजन को कम करने और मौजूदा प्लाक को स्थिर करने में मदद करती हैं। इससे प्लाक के अचानक टूटने और वहां रक्त का थक्का बनने का जोखिम कम होता है। प्लाक का टूटना और उसके ऊपर थक्का बनना अचानक रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है और यही हार्ट अटैक के प्रमुख कारणों में से एक है।" 


हल्के से मध्यम स्तर की कोरोनरी बीमारी, खासकर जब ब्लॉकेज लगभग 50 से 70 प्रतिशत से कम हो और हृदय की मांसपेशियों तक रक्त की आपूर्ति में गंभीर कमी न हो, ऐसे मामलों में डॉक्टर की निगरानी में उचित दवाओं के साथ नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण, धूम्रपान से परहेज और अन्य जीवनशैली में बदलाव उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर 50 या 70 प्रतिशत ब्लॉकेज का इलाज एक ही तरीके से किया जाएगा। 


डॉ. रामजी ने आगे बताया “जब आर्टरीज़ में गंभीर संकुचन हो जाता है, तो केवल दवाओं से उस संकरी हुई धमनी को शारीरिक रूप से चौड़ा करना संभव नहीं होता। आमतौर पर लगभग 70 प्रतिशत या उससे अधिक महत्वपूर्ण ब्लॉकेज, या लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी में लगभग 50 प्रतिशत या उससे अधिक ब्लॉकेज, हस्तक्षेप की आवश्यकता पैदा कर सकते हैं। इसी तरह यदि पर्याप्त दवा उपचार के बावजूद एंजाइना यानी सीने में दर्द बना रहता है, कई आर्टरीज़ में जटिल ब्लॉकेज मौजूद हैं, हृदय की पंपिंग क्षमता कमजोर है या मरीज को अचानक हार्ट अटैक हुआ है, तो रक्त प्रवाह बहाल करने के लिए प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।"  


मल्टी-वेसल डिजीज, लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी के ब्लॉकेज, कमजोर हृदय की पंपिंग क्षमता और विशेष रूप से डायबिटीज वाले कुछ मरीजों में, उपयुक्त परिस्थितियों में बाईपास सर्जरी लंबे समय तक रक्त प्रवाह बहाल करने और दोबारा प्रक्रिया की आवश्यकता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सीएबीजी की तकनीकों में भी लगातार प्रगति हुई है।  


टोटल आर्टेरियल रिवास्कुलराइजेशन में पैरों की नसों के बजाय छाती और हाथ की आर्टरीज़ जैसी आर्टेरियल ग्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाता है। इन ग्राफ्ट की दीर्घकालिक टिकाऊ क्षमता बेहतर हो सकती है और उचित मरीजों में वे कई वर्षों तक प्रभावी रूप से काम कर सकते हैं। 

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