पानीपत: मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का रक्त कैंसर है, जो बोन मैरो में मौजूद प्लाज्मा कोशिकाओं (प्लाज्मा सेल्स) में विकसित होता है। सामान्य परिस्थितियों में ये कोशिकाएं शरीर को संक्रमणों से बचाने के लिए एंटीबॉडी बनाती हैं, लेकिन मल्टीपल मायलोमा में ये कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और स्वस्थ रक्त कोशिकाओं के निर्माण में बाधा उत्पन्न करती हैं। इसके कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और हड्डियों, किडनी तथा रक्त निर्माण प्रणाली पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में लगातार हड्डियों में दर्द, अत्यधिक थकान, बार-बार संक्रमण होना, कमजोरी और किडनी से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
मल्टीपल मायलोमा में कैंसरग्रस्त प्लाज्मा कोशिकाएं बोन मैरो में जमा होकर लाल रक्त कोशिकाओं, श्वेत रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स के सामान्य उत्पादन को कम कर देती हैं। इसके परिणामस्वरूप एनीमिया, बार-बार संक्रमण और रक्तस्राव या आसानी से चोट लगने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही, ये असामान्य कोशिकाएं ऐसे प्रोटीन बनाती हैं जो किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं और हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका के बीएमटी एवं हीमेटो ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रतिभा धीमान ने बताया “इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर धीरे-धीरे विकसित होते हैं और कई बार अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे दिखाई देते हैं, जिसके कारण मरीज उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। लगातार थकान, कमजोरी, बार-बार संक्रमण, बिना किसी बड़े कारण के हड्डी टूट जाना, हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन, अत्यधिक प्यास लगना और किडनी से जुड़ी समस्याएं इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है। मल्टीपल मायलोमा का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन बढ़ती उम्र, विशेषकर 60 वर्ष से अधिक आयु, कुछ आनुवंशिक परिवर्तन, लंबे समय तक रेडिएशन या औद्योगिक रसायनों के संपर्क में रहना तथा मोनोक्लोनल गैमोपैथी ऑफ अनडिटरमाइंड सिग्निफिकेंस (MGUS) जैसी स्थितियां इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
मल्टीपल मायलोमा के निदान के लिए चिकित्सक मरीज के मेडिकल इतिहास, शारीरिक परीक्षण और कई विशेष जांचों का सहारा लेते हैं। रक्त जांच के माध्यम से असामान्य प्रोटीन, कैल्शियम स्तर, हीमोग्लोबिन और किडनी की कार्यक्षमता का मूल्यांकन किया जाता है।
डॉ. प्रतिभा ने आगे बताया “हालांकि मल्टीपल मायलोमा को हमेशा पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं होता, लेकिन आधुनिक चिकित्सा ने इसके उपचार में उल्लेखनीय प्रगति की है। कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट जैसे उपचार रोग को नियंत्रित करने और मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने में प्रभावी साबित हो रहे हैं। चूंकि यह बीमारी हड्डियों को प्रभावित करती है, इसलिए हड्डियों को मजबूत बनाने वाली दवाएं, दर्द प्रबंधन और फिजिकल रिहैबिलिटेशन भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
