युवाओं तक पहुंच रही लिवर डिज़ीज़ जागरूकता और प्रिवेंशन जरूरी समय

युवाओं तक पहुंच रही लिवर डिज़ीज़ जागरूकता और प्रिवेंशन जरूरी समय

बहादुरगढ़: यही लिवर से जुड़ी बीमारियों की सबसे बड़ी चुनौती है—ये अक्सर बिना लक्षणों के धीरे-धीरे बढ़ती हैं और देर से पकड़ में आती हैं। बदलती लाइफस्टाइल, अनहेल्दी फूड हैबिट्स, बढ़ता अल्कोहल कंज़म्पशन और मोटापा भारत में लिवर डिज़ीज़ को एक बड़ी पब्लिक हेल्थ चिंता बना रहे हैं।

 

लिवर एक बेहद ज़रूरी अंग है, जो डाइजेशन, डिटॉक्सिफिकेशन, मेटाबॉलिज़्म और इम्युनिटी में अहम भूमिका निभाता है। जब लिवर को नुकसान पहुँचता है, तो पूरा शरीर प्रभावित होता है। फैटी लिवर डिज़ीज़, हेपेटाइटिस B और C, अल्कोहल से जुड़ी लिवर बीमारी, सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी स्थितियाँ आज चिंताजनक स्तर पर सामने आ रही हैं, और यह समस्या अब युवाओं में भी बढ़ रही है।

 

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी व एंडोस्कोपी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर व यूनिट हेड डॉ. अंकुर जैन ने बताया “आज सबसे आम समस्याओं में फैटी लिवर डिज़ीज़ शामिल है, जिसका सीधा संबंध मोटापे, डायबिटीज़ और फिज़िकल एक्टिविटी की कमी से है। बहुत से लोग गलतफहमी में रहते हैं कि लिवर की बीमारी सिर्फ अल्कोहल पीने वालों को होती है, जबकि हकीकत यह है कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ देश में क्रॉनिक लिवर प्रॉब्लम्स की बड़ी वजह बन चुकी है। अल्कोहल भी एक बड़ा रिस्क फैक्टर बना हुआ है। नियमित या ज़रूरत से ज़्यादा शराब का सेवन धीरे-धीरे लिवर सेल्स को नुकसान पहुँचाता है और इससे सिरोसिस जैसी इररिवर्सिबल स्थिति पैदा हो सकती है। दुर्भाग्य से, जब पीलिया, पेट में सूजन या अंदरूनी ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी अक्सर एडवांस स्टेज में पहुँच चुकी होती है।“

 

हालाँकि, प्रिवेंशन पूरी तरह संभव और असरदार है। कुछ आसान लाइफस्टाइल बदलाव लिवर को स्वस्थ रखने में बड़ा फर्क ला सकते हैं। प्रोसेस्ड और तली-भुनी चीज़ों की जगह फलों, सब्ज़ियों, होल ग्रेन्स और लीन प्रोटीन से भरपूर बैलेंस्ड डाइट अपनानी चाहिए। हेल्दी वज़न बनाए रखना और रेगुलर एक्सरसाइज़ उतनी ही ज़रूरी है। पर्याप्त पानी पीना और अच्छी नींद भी लिवर फंक्शन को सपोर्ट करती है।

 

डॉ. अंकुर ने आगे बताया “पेनकिलर्स, हर्बल सप्लीमेंट्स और ओवर-द-काउंटर दवाओं का बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें से कई दवाएँ लिवर को नुकसान पहुँचा सकती हैं। हेपेटाइटिस A और B का वैक्सीनेशन, खासकर बच्चों और हाई-रिस्क लोगों के लिए, बेहद ज़रूरी है। सुरक्षित भोजन और साफ पीने का पानी लिवर को नुकसान पहुँचाने वाले इंफेक्शन्स से बचाने में मदद करता है। यह जानना भी उतना ही अहम है कि कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। लगातार थकान, आँखों या त्वचा का पीला पड़ना, पेट में परेशानी, बिना वजह वज़न कम होना या ब्लड टेस्ट में गड़बड़ी जैसे संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। रेगुलर हेल्थ चेक-अप और लिवर फंक्शन टेस्ट शुरुआती स्टेज में समस्या पकड़ने में मदद करते हैं, जब इलाज सबसे ज्यादा प्रभावी होता है।“

 

साफ संदेश यही है कि लिवर रोग गंभीर ज़रूर हैं, लेकिन काफी हद तक रोके जा सकते हैं। जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और जिम्मेदार लाइफस्टाइल चॉइसेज़ इस महत्वपूर्ण अंग की रक्षा कर सकती हैं और ज़िंदगियाँ बचा सकती हैं। आपका लिवर हर दिन चुपचाप काम करता है—इसे इररिवर्सिबल डैमेज से पहले सही समय पर देखभाल और ध्यान मिलना ही चाहिए।

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